अफगान स्पेशल सेल (Afghan Special Cell) को पिछले 5 दिनों में दो हजार से ज्यादा कॉल मदद के लिए आई हैं. जबकि 6 हजार से ज्यादा व्हाट्सऐप संदेशों का जवाब दिया गया है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि करीब 1200 से ज्यादा मेल पर भी जवाब देकर परेशान लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है.

नई दिल्ली: Mission Kabul : तालिबान (Taliban) के कब्जे वाले अफगानिस्तान (Afghanistan Crisis) से निकलने के लिए भारतीय या अन्य विदेशी नागरिक किस कदर जद्दोजहद कर रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्रालय (Minister Of External Ministry) द्वारा स्थापित अफगान स्पेशल सेल (Afghan Special Cell) को पिछले 5 दिनों में दो हजार से ज्यादा कॉल मदद के लिए आई हैं. जबकि 6 हजार से ज्यादा व्हाट्सऐप संदेशों का जवाब दिया गया है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि करीब 1200 से ज्यादा मेल पर भी जवाब देकर परेशान लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है. गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस और नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Indians IGI Airport) र रविवार को आए भारतीयों ने अपनी आपबीती भी सुनाई.

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक़ पिछले पांच दिनों में अफगान स्पेशल सेल को 2000 से अधिक फ़ोन कॉल आए हैं. ये सेल अफगानिस्तान से भारत आने को बेताब भारतीयों और अन्य जरूरतमंद नागरिकों की मदद के लिए बनाया गया है. इसमें वीजा, पासपोर्ट और आव्रजन संबंधी तमाम जरूरतों की जानकारी भी दी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि व्हाट्सऐप के लिए आए क़रीब 6000 संदेशों का जवाब दिया गया है. मदद के लिए आए 1200 ईमेल का जवाब दिया गया है.

मदद की ये पुकार काबुल ही नहीं अफ़ग़ानिस्तान के अलग अलग इलाक़ों से की जा रही है. इसमें सिर्फ़ भारतीय ही नहीं हैं बल्कि बड़ी तादाद में वे अफ़ग़ानी हैं जो अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे.गौरतलब है कि रविवार तड़के तीन विमान काबुल से वाया दोहा और दुशांबे के रास्ते नई दिल्ली पहुंचे हैं. इसके जरिये 250 से ज्यादा भारतीयों को स्वदेश लाया गया है. जबकि कई अफगान नागरिक भी भारत आए हैं.

रविवार को ताजिकिस्तान और कतर की राजधानी दोहा के रास्ते काबुल से 250 से ज्यादा यात्री भारत पहुंचे. जबकि एयरफोर्स के विशेष विमान के जरिये 168 यात्री गाजियाबाद के हिंडन एय़रबेस पहुंचा है. इनमें से 107 भारतीय नागरिक हैं. जबकि 24 अफगान नागरिक हैं. इसमें दो अफगानी संसद के सीनेटर नरेंद्र सिंह खालसा और अनारकली भी हैं.

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