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परशुराम महादेव काे नेशनल पार्क से बाहर रखने पुजारी काे साबित करना हाेगा 1930 से स्वामित्व, केन्द्रीय वन मंत्री जावड़ेकर खुद प्रतिनिधि मंडल से मिलने पहुंचे।


परशुराम महादेव काे नेशनल पार्क से बाहर रखने पुजारी काे साबित करना हाेगा 1930 से स्वामित्व, केन्द्रीय वन मंत्री जावड़ेकर खुद प्रतिनिधि मंडल से मिलने पहुंचे।

- वन विभाग व प्रशासनिक विभाग से रिपोर्ट मंगवाएंगे दिल्ली
- परशुराम महादेव सहित अन्य धार्मिक स्थलों को कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क से बाहर रखने की मांग
- राज्यसभा सांसद माथुर की अगुवाई में मंत्री को ज्ञापन सौंपा
सादड़ी। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केन्द्र बाबा परशुराम महादेव [Parshuram Mahadev] तीर्थ स्थल को प्रस्तावित कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क [Kumbhalgarh National Park] के दायरे से बाहर लेने की गूंज सोमवार को दिल्ली में भी सुनाई दी। यहां राज्यसभा सांसद ओमप्रकाश माथुर [Rajya Sabha MP Om Prakash Mathur], पूर्व सांसद पुष्प जैन व भाजपा नेता नरेश ओझा की अगुवाई में पहुंचे प्रतिनिधि मंडल ने केन्द्रीय वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर [Central Forest Minister Prakash Javadekar] से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। जिसमें मंत्री जावड़ेकर ने विश्वास दिलाया कि धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने हरसंभव सहयोग की बात कही। साथ ही प्रशासनिक व वन विभाग से रिपोर्ट भी मंगवाने की बात कही, ताकि इस पर कुछ निर्णय लिया जा सके।
दरअसल, राणकपुर जैन तीर्थ व मुछाला महावीर मंदिर की तर्ज पर परशुराम महादेव मंदिर, सूर्य मंदिर, शक्ति माता मंदिर सहित पेयजल स्रोतों को प्रस्तावित पार्क के दायरे के बाहर लेने की मांग को लेकर पिछले दिनों कस्बे बंद रखे गए तो ज्ञापन भी दिए गए।  पहले इस मामले में एक प्रतिनिधि मंडल जयपुर भी जाकर आया। इसके बाद प्रतिनिधि मंडल मंत्री से मिलने दिल्ली पहुंचा।
‘भोले’ की सुनने खुद पहुंचे मंत्री जावड़ेकर
परशुराम महादेव के लिए प्रतिनिधि मण्डल सोमवार सुबह नई दिल्ली पहुंचा, जहां वे पूर्व सांसद पुष्प जैन से मिले। इसके बाद राज्यसभा सांसद ओमप्रकाश माथुर के निवास पहुंचे, जहां से वे लोकसभा पहुंचे। माथुर के चैम्बर में पहुंचे, जहां व्यस्तता के बावजूद केन्द्रीय वन मंत्री जावड़ेकर खुद प्रतिनिधि मंडल से मिलने पहुंचे। यहां माथुर की अगुवाई में उनको ज्ञापन
सौंपा गया और बताया गया कि वन विभाग और सरकार लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केन्द्र को प्रस्तावित नेशनल पार्क के दायरे में ले रही है। इससे श्रद्धालुओं को दिक्कत होगी। ये भी बताया कि ये तीर्थ पाली व राजसमंद दो जिलों की संयुक्त सीमा में स्थित है। इतना ही नहीं, मेवाड़़ रियासत ने 1943-48 के दौरान पुजारी नवलपुरी को 23 बीघा जमीन पर खातेदारीअधिकार प्रदत्त कर पूजा-अर्चना, दर्शन व धार्मिक अनुष्ठान के हक हकूक दिए थे। उन्होंने राणकपुर से सटे सूर्य मंदिर व शक्ति माता मंदिर को भी इस पार्क के दायरे से बाहर लेने की गुहार लगाई। इस पर मंत्री जावड़ेकर ने विश्वास दिलाया कि आराध्य परशुराम महादेव को पार्क से बाहर लेने के लिए वन विभाग से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। जितना भी संभव होगा, उतना पूरा सहयोग किया जाएगा।
यहां परशुराम संरक्षण संघर्ष समिति से सनातन धर्म ट्रस्ट अध्यक्ष गोविन्दप्रसाद व्यास, भाजपा नेता नरेश ओझा, पालिकाध्यक्ष दिनेश मीणा, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष सुरेशपुरी गोस्वामी, नगर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश मेवाड़ा, वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी, तरूण सुथार, बाबूलाल चौधरी आदि मौजूद थे।
मंत्री से मिला सकारात्मक जवाब
केन्द्रीय वन मन्त्री ने राज्यसभा सांसद माथुर सहित प्रतिनिधि मंडल को सकारात्मक जवाब दिया है। उन्होंने परशुराम महादेव तीर्थ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होने देने का भरोसा दिलाया। साथ ही परशुराम महादेव तीर्थ को इस पार्क के दायरे से बाहर लेने के लिए शीघ्र वनअधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारी से रिपोर्ट मंगवाने को कहा है। - पुष्प जैन, पूर्व सांसद व नरेश ओझा, भाजपा नेता

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