विश्व संगीत दिवस कुल 110 देशों में ही मनाया जाता है (जर्मनी, इटली, मिस्र, सीरिया, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, कांगो, कैमरून, मॉरीशस, फिजी, कोलम्बिया, चिली, नेपाल, और जापान आदि)। विश्व संगीत दिवस के अलावा इसे संगीत समारोह के रूप में भी जाना जाता है। विश्व संगीत दिवस का उद्देश्य लोगों को संगीत के प्रति जागरूक करना है ताकि लोगों का विश्वास संगीत से न उठे। फ्रांस में इस दिन सारे कार्यक्रम मुफ्त में, जी हां मुफ्त में सभी के लिए खुले होते हैं। बड़े-से-बड़ा कलाकार भी इस दिन बगैर पैसे लिए प्रदर्शन करता है। ये संगीत को सर्व-सुलभ बनाने का दिन होता है। इस दिन दुनियां का बड़े से बड़ा कलाकार गाना गाने का पैसा नहीं लेता, उस दिन दुनिया भर में संगीत का आयोजन किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि हर ‌किसी शख्स के साथ अपने पसंद की गीत सुनने के दौरान शरीर के संवेदनशील अंगों में हरकतें होती हैं। मन झुमने लगता है, ‌दिमाग में आनंद छा जाता है, कभी ‌किसी धुन पर आंसू तक ‌निकल आते हैं। दरअसल मनोवैज्ञा‌निक भी मानते हैं ‌कि संगीत का सेहत से गहरा संबंध है। संगीतकारों का कहना है ‌कि हर राग जीवन से जुडा है और तन मन तो स्वत: रागों में खो जाते हैं। आ‌दि काल से संगीत का सेहत पर पडने वाले साकारात्मक पहलू को ही अब संगीत थैरेपी का नाम दे ‌दिया गया है। अब ‌विज्ञान के क्षेत्र में संगीत के सेहत से संबंध पर शोध हो रहे हैं। मानव पर यह संगीत का बढता प्रभाव ही है ‌कि हाल के वर्षों से 21 जून को संगीत ‌दिवस के रूप में भी मनाया जाने लगा है।  
 प्रकृति के कण-कण में संगीत 
योग से हम स्वस्थ्य रहते हैं उसी तरह हम संगीत से भी स्वस्थ्य व प्रसन्न रहते हैं। कहा जाता है कि प्रकृति के कण-कण में संगीत का सुर सुनाई देता है। जैसे- सुबह की हवा, चिड़ियों का चहकना और पेड़ों के पत्ते का लहराना, सभी संगीत के रूप में जाने जाते हैं। हम सभी की आत्मा में संगीत बस चुका है, हम खुश रहते हैं तो संगीत, गम में संगीत यानी सुख-दुख का साथी है संगीत जिससे हम कभी नहीं दूर रह सकते। संगीत वही है जिसमें लय हो, इस तर्ज पर कविताएं भी संगीत से कम नहीं होतीं। उनमें लय है, शब्दों के आरोह-अवरोह हैं और गायन भी है।
संगीत में जादू 
संगीत में जादू जैसा असर है। भगवान् श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के द्वारा मधुर तान छेड़कर तीनों लोकों को मोह लिया था। पावस की लाजवंती संध्याओं को श्वेत-श्याम मेघ मालाओं से नन्हीं-नन्हीं बूंदों का रिमझिम-रिमझिम राग सुनते ही कोयल कूक उठती हैं, पपीहे गा उठते हैं, मोर नाचने लगते हैं तथा मजीरे बोल उठते हैं, लहलहाते हुए खेतों को देखकर किसान आनंद विभोर हो जाता है और वह अनायास राग अलाप उठता है। यही वह समय होता है जबकि प्रकृति के कण-कण में संगीत की सजीवता विद्यमान होती है। इन चेतनामय घडि़यों में प्रत्येक जीवधारी पर संगीत की मादकता का व्यापक प्रभाव पड़ता है।