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One Nation-One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म

One Nation-One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म, PM मोदी ने दिया कमेटी बनाने का प्रस्ताव

  • One Nation, One Election पर सर्वदलीय बैठक खत्म
  • सर्वदलीय बैठक में शिवसेना भी मौजूद नहीं
  • शरद पवार, सीताराम येचुरी, नवीन पटनायक समेत पहुंचे कई नेता

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi ) की अध्यक्षता में One Nation , One Election मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक की जानकारी देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अधिकांश दलों ने इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में वन नेशन, वन इलेक्शन पर एक कमेटी के गठन का प्रस्ताव दिया है। जो इससे जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगी।

बैठक में कई दलों के प्रमुख हिस्सा ने हिस्सा लिया जबकि कई दलों ने दूरी बना ली। आपको बता दें कि प्रचंड बहुमत के साथ देश की सत्ता पर दोबारा काबिज होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। संसद के बजट सत्र से पहले ही उन्होंने one nation one election का राग छेड़ दिया है। खास बात यह है कि विपक्ष में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। कांग्रेस पार्टी ने जहां इस बैठक में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया वहीं तृणमूल कांग्रेस और बसपा, एसपी, टीडीपी समेत कई दलों ने बैठक से किनारा कर लिया।


क्या सोचते हैं पीएम मोदी 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश में लोकसभा के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव भी एकसाथ कराए जाएं जिससे धनबल के साथ-साथ जन-बल की भी बचत होगी।

अखिलेशः जनता से किए वादों पर काम करे सरकार
पीएम मोदी की ओर से one nation one election मुद्दे पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में ना जाने पर सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा बेहतर ये होगा कि बीजेपी ने जनता से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करने पर ध्यान दें। हमें उम्मीद है कि मोदी सरकार जनता की कसौटी पर ज्यादा खरी उतरेगी। जहां तक one nation one election का सवाल है तो इससे कई पार्टियां असहमत हैं।
इन दलों ने बनाई दूरी
- दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने इस बैठक में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया है। हालांकि ये निर्णय पार्टी ने बैठक से कुछ देर पहले ही लिया है। इससे पहले इस मुद्दे पर जब कांग्रेस से बात करने की कोशिश की गई,पार्टी की ओर से कोी जवाब नहीं मिला।
- एनडीए की सहयोगी पार्टी टीडीपी ( TDP ) ने भी एक राष्ट्र, एक चुनाव अवधारणा पर आधारित सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि अलग राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर चंद्र बाबू नायडू ने एनडीेए ने नाता तोड़ दिया था।
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस भी सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी में हिस्सा लेने से मना कर दिया।
- मायावती ने भी इस बैठक से किनारा कर लिया है। यानी बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति भी इस बैठक में नहीं दिखी।
ये दल बैठक में शामिल
पीएम मोदी की ओर से एक राष्ट्र, एक चुनाव ( One Nation, One Election ) पर चर्चा के लिए बुलाई बैठक में जनता दल (सेक्यूलर) से कुपेंद्र रेड्डी, एनसीपी से शरद पवार, अकाली दल से सुखबीर बादल, सीपीएम से सीताराम येचुरी, जनता दल (यूनियन) की ओर से नीतीश कुमार, वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी, बीजेडी से नवीन पटनायक, टीआरएस से केसीआर और आम आदमी पार्टी से राघव चड्ढा प्रमुख रूप से हिस्सा ले रहे हैं।

इसलिए पक्ष में भाजपा
भाजपा 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के पक्ष में है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे भाजपा को पूरे देश में एक मजबूत सरकार बनाने में मदद मिलेगी। अधिकांश सर्वेक्षणों से यह पता चला है कि लोग पीएम मोदी का समर्थन करते हैं।
इसलिए बनाई अन्य पार्टियों ने दूरी
कांग्रेस जैसी अन्य पार्टियों के मामले में, 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के लिए उनके पास अभी भी कोई मजबूत चेहरा नहीं है। जिससे उन राज्यों में कांग्रेस या दूसरे राजनीतिक दल को हार का सामना करना पड़ सकता है।
भ्रम की स्थिति पैदा होती है
एक राष्ट्र, एक चुनाव से कुछ नुकसान भी हैं। जैसे जब चुनाव एक साथ होते हैं तो स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच भ्रम की स्थिति होती है। दरअसल राज्यों के विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़े जाते हैं। जबकि लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर। लेकिन एस साथ चुनाव में स्थानीय मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इससे मतदाताओं को राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों में भ्रम पैदा हो जाता है।