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इंडियाज मोस्ट वांटेड / फिल्म की कमजोर कड़ी बने अर्जुन, जोश जगाने वाले किरदार को बना दिया नीरस



स्टार रेटिंग3/5 
स्टारकास्टअर्जुन कपूर, सुदेव नायर 
डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता 
प्रोड्यूसर राजकुमार गुप्ता 
म्यूजिक डायरेक्टर अमित त्रिवेदी 
जॉनरथ्रिलर
बॉलीवुड डेस्क. इंडियाज मोस्ट वांटेड कहानी है पांच साहसी इंटेलीजेंस ऑफिसर्स की जो एक ख़तरनाक आतंकवादी को पकड़ने लिए निहत्ते चल पड़ते है। इनका लीडर प्रभात (अर्जुन कपूर) है। प्रभात को ख़बर मिलती है कि आतंकवादी यूसुफ़ जो भारत के कई शहरों मे बम रखकर आतंक फैला रहा था, वो नेपाल में बैठा है।

प्रभात और उसके चार साथियों को इस मिशन के लिए नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिलती। लेकिन प्रभात को यक़ीन है के वो यूसुफ़ को पकड़ सकता है। उसका यक़ीन देखकर उसका सीनियर (राजेश सिंह) उसकी टीम को चुपके से नेपाल जाने का अनुमति देता है। उनके साथ  चार पुलिस के अफसर जुड़ जाते है। नेपाल पहुंचकर कर ख़बरी की मदद से यूसुफ़ तक पहुंच तो जाते हैं लेकिन उनके पास सिर्फ़ चार दिन होता है उस आतंकी को पकड़ने के लिए। 

कैसी है फिल्म?

  1. यासीन भटकल से प्रेरित है कहानी

    यूसुफ़ (सुदेव नायर) का कैरेक्टर डायरेक्टर राजकुमार गुप्ता ने आतंकी यासीन भटकल से प्रेरित होकर लिखा है। भटकल जो मुजाहिद्दीन ग्रुप का हिस्सा थे, भारत में 2007 से 2013 तक कई शहरों में बम ब्लास्ट किया था और उन्हें नेपाल के बॉर्डर से गिरफ़्तार किया गया था। राजकुमार गुप्ता का इस थ्रिलिंग कहानी के साथ अप्रोच तो काफ़ी अच्छा है! वो अपने सेंट्रल कैरेक्टर प्रभात और उसके चार साथियों को सामान्य लोगों की तरह ही देखते है ना के उन्हें हीरोज़ के तरह पेश करते हैं। गुप्ता ने उनके पिछले साल की फ़िल्म रेड में भी यही अप्रोच लिया था। ऐसा करने से फ़िल्म ज़्यादा मुमकिन लगती है और दर्शकों का स्टोरी में इन्वॉल्व्मेंट ज़्यादा हो जाताहै। लेकिन फ़िल्म में फिर भी कमी महसूस होती है क्योंकि डायरेक्टर कई चीज़ें जैसे बम ब्लास्ट्स के फुटेज को बार बार रिपीट करते है जो कहानी  के फ़्लो पर असर करती है।
  2. किरदार में जमे नहीं अर्जुन

    गुप्ता ने बाक़ी एक्टर्स काफी अच्छे चुने हैं और वो अपना किरदार बख़ूबी निभाते है। लेकिन उनका लीड हीरो अर्जुन कपूर ना तो अपने किरदार को सूट करता है और ना ही ऐसा लगता है कि उसने अपने किरदार में ढलने के लिए बहुत मेहनत की है। नायर जिन्होंने यूसुफ़ का रोल निभाया है उनको ज़्यादा कुछ करने के लिए नहीं है पर वो काफ़ी प्रभावी रहे। सबसे अच्छा परर्फ़ॉर्मन्स रहा जितेंद्र शास्त्री का जिन्होंने ख़बरी की भूमिका निभाई है। 
  3. कमजोर है म्यूजिक

    यह फ़िल्म की कहानी काफी थ्रिलिंग है और फिल्म शायद ज़्यादा प्रभावशाली होती अगर गुप्ता थोड़े और कॉन्फ़िडेन्स और चतुरता के साथ इसे बनाते और बैकग्राउंड म्यूज़िक बेहतर होता। साथ ही अगर उनका लीड किरदार बार-बार अपने देश प्रेम को नहीं जताता तो शायद फिल्म थोड़ी और बेहतर हो सकती थी।