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अमेठी / राहुल की हार की समीक्षा कर रही कांग्रेस, सोनिया-प्रियंका के करीबियों को जिम्मेदारी


  • पार्टी अध्यक्ष की हार की समीक्षा जमीनी स्तर पर हो रही, तीन दिन से बैठकों का दौर जारी
  • लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराया

अमेठी. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को परंपरागत सीट अमेठी में मिली हार की पार्टी समीक्षा कर रही है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के करीबियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमेठी से तीन बार सांसद रहे राहुल को इस बार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा।
उत्तरप्रदेश कांग्रेस के सदस्य राजीव सिंह ने बताया, सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा और प्रियंका गांधी का राजनीतिक कामकाज देखने वाले जुबैर खान पिछले तीन दिन से अमेठी में हैं और हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं। सिंह ने बताया कि हार की समीक्षा जमीनी स्तर पर यानी गांवों में की जा रही है। कमेटी के सदस्य पंचायत और ब्लॉक प्रमुखों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
2014 में भी राहुल को मिली थी कड़ी टक्कर
स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराया। इसके बाद यहां अमेठी कांग्रेस अध्यक्ष ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा भी दे दिया है। 2014 में राहुल गांधी इस सीट से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए थे। तब भाजपा ने राज्यसभा सांसद स्मृति ईरानी को यहां से मैदान में उतारा था। ईरानी ने 3 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर राहुल को कड़ी टक्कर दी थी।
गांधी परिवार की पारंपरिक सीट रही अमेठी
अमेठी से 1977 में पहली बार संजय गांधी ने यहां से चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए। इसके बाद 1980 में संजय गांधी यहां से सांसद चुने गए। उनकी मौत के बाद अमेठी सीट पर हुए उपचुनाव में राजीव गांधी ने जीत हासिल की। राजीव 1981 से लेकर 1991 तक यहां से सांसद रहे। उनके निधन के बाद कांग्रेस के सतीश शर्मा यहां से 1991 से लेकर 1998 तक सांसद रहे। 1998 में भाजपा के संजय सिंह ने सतीश शर्मा को चुनाव में शिकस्त दी। लेकिन 1999 में राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने संजय सिंह को चुनाव में हराया और 1999-2004 तक अमेठी की सांसद बनी रहीं। इसके बाद 2004 से 2014 तक तीन बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी के सांसद बने।
16 बार कांग्रेस ने जीती यह सीट
अमेठी संसदीय सीट पर अभी तक 17 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने 16 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वहीं, 1977 में लोकदल और 1998 और 2019 में भाजपा को जीत मिली।