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सादड़ी / बारिश ने बिगाड़ा वन्यजीव की गणना का आंकड़ा



बारिश ने बिगाड़ा वन्यजीव की गणना का आंकड़ा, यहां के अभयारण्य में 15 से 17 प्रजातियां करती है निवास

सादड़ी। कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में बुद्धपूर्णिमा को सम्पन्न वाटरहॉल्स पद्धति से वन्यजीवों की गणना के आंकड़े आशानुरूप प्राप्त नहीं हुए। इसका प्रमुख कारण गणना से एक दिन पहले वन क्षेत्र के कई जगह हुई जोरदार बारिश से प्राकृतिक वॉटरहॉल्स बनना भी माना जा रहा है। नए जलस्रोत बनने से विभाग के चिन्हित वॉटर हॉल्स तक वन्यजीवों की सहज आवाजाही नहीं हो पाई। हालांकि वनविभाग भी इस गणना को आंशिक अनुमानित आकलन मानता है।
पिछले दिनों सफारी भ्रमण पर आए सैलानियों की मानें तो पैन्थर, भालू, साम्भर व चौसिंगा परिवारों के साथ जैसे दृश्य दिखे उसके अनुसार इनके कुनबे में इजाफा हुआ है। इस बार भेडिय़ा, सियार व चिन्कारा कहीं नजर नहीं आए। जिनकी संख्या में कमी भी आ रही है। वन क्षेत्र की 5 रैन्जों में एक साथ सम्पन्न हुई वन्यजीव गणना 2019 के दौरान मांसाहारी, शाकाहारी, रेप्टाइल्स व पक्षी वर्ग की कई प्रजाति वॉटर हॉल्स पर प्यास बुझाने आए जहां पहले से तैनात गणक ने इनकी उपस्थिति को दर्ज की। ज्ञात रहे प्रदेश का एकमात्र कुम्भलगढ़ अभयारण्य है जिसमें सर्वाधिक करीब 15-17 हजार प्रजाति के वन्यजीव निवास करते हैं।
यह है स्थिति
विभागीय सूत्रों से प्राप्त वन्यजीव गणना आकंड़ों के अनुसार कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में वर्ष 2016 में पैन्थर की तादाद 95, 2017 में 101 व वर्ष 2018 में 121 दर्ज हुई। यहां पर्यटक उत्साहित नजर आ रहे हैं। कई वनपथ पर भालू, जरख, साम्भर, चौसिंगा, जंगली सूअर, सियार, सेही, लोमड़ी सहज दिख जाते हैं।
वन्यजीव गणना आंकड़ें 2019 (कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की 5 रैन्ज)
वन्यजीव कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य
वर्ष- 2019, 2018, 2017, 2016
पैन्थर- 119, 121, 101, 95
जरख- 141, 209, 191, 180
भेडिया- 16, 17, 12
भालू- 187, 283, 264, 258
सियार- 343, 289, 444, 93
लोमड़ी- 69, 117, 101, 93
साम्भर- 322, 396, 378, 337
चिन्कारा- 29, 00, 12
चौसिंगा- 102, 126, 113, 103
जंगली सूअर- 342, 834, 852, 719
सेही- 90, 109, 91, 80
नीलगाय- 1058, 1803, 1585, 1462
-जंगली बिल्ली 73, बिज्जु काला 38, छोटा बिज्जु 44, पाटागोह 29, नेवला साधारण 260,नेवला काली पूंछ 38, खरगोश 272, लंगूर 5085
(स्त्रोत वन विभाग मुख्यालय से प्रदत्त आंकड़ों के अनुसार)
वाटरहॉल्स पद्धति से वन्यजीवों की गणना
वाटरहॉल्स पद्धति से सम्पन्न वन्यजीव गणना 2019 के आंकड़े उत्साहित करने वाले नहीं मिलने का प्रमुख कारण गणना पूर्व बारिश से कई वाटरहाल्स निर्मित हो गए। जिनसे चिन्हित वाटरहॉल्स तक वन्यजीव की आवाजाही नहीं हो पाई। हालांकि यह गणना आंशिक अनुमान है। पैन्थर, भालू सहित विविध प्रजाति के वन्यजीवों में इजाफा होने के अनुमान हैं। कई वन्यजीवों के वाटरहॉल्स तक नहीं पहुंचने से वे सभी संख्यात्मक आंकड़े में आने से वंचित रह गए हों। वन्यजीवों सहित अरण्य वानस्पतिकी व पारिस्थितिकी में वृद्धि हो इसके सार्थक प्रयास हो रहे हैं।