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कुम्भलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में ही रहेंगे परशुराम तीर्थ व सूर्य मंदिर, तय हुई 37 धार्मिक स्थलों की सीमाएं


कुम्भलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में ही रहेंगे परशुराम तीर्थ व सूर्य मंदिर, तय हुई 37 धार्मिक स्थलों की सीमाएं

- पाली, उदयपुर, राजसमंद व अजमेर जिलों की सीमा में बनाया उद्यान
- कुम्भलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में ही रहेंगे परशुराम तीर्थ व सूर्य मंदिर
- रणकपुर जैन मंदिर व मुछाला महावीर जैन तीर्थ उद्यान सीमा से रहेंगे मुक्त
- 37 धार्मिक स्थलों के दावों के निस्तारण के बाद तय हुई सीमा
सादड़ी। कुम्भलगढ़ राष्ट्रीय उद्यान का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विश्व विख्यात रणकपुर जैन मंदिर व मुछाला महावीर जैन तीर्थ को इस सीमा से बाहर रखा गया है। लेकिन, सूर्य मंदिर रणकपुर व परशुराम महादेव तीर्थ सहित अन्य धार्मिक स्थलों को सीमा के अंदर लिया गया है। एेसे में सीमा में स्थित धर्म स्थलों पर जाने के इच्छुक श्रद्धालुओं को वन विभाग के नियमों के तहत अनुमति लेनी होगी। पिछले दिनों, पाली, राजसमंद, अजमेर व उदयपुर जिला कलक्टर ने आपत्तियों व दावों की सुनवाई कर इस उद्यान को हरी झंडी दी थी। जल्द ही इसकी अंतिम अधिसूचना जारी हो जाएगी।
दरअसल, राज्य सरकार ने वर्ष नव बर 2011 में पाली, राजसमंद, उदयपुर जिलों की वनभूमि को शामिल करते हुए राष्ट्रीय उद्यान (कुम्भलगढ़ नेशनल पार्क) घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद सीमा में काबिज लोगों से दावे मांगे गए। इस पर तीनों जिलों से 319 दावे भूमि एवं 37 दावे धार्मिक तीर्थस्थलों के सामने आए थे। भूमि सम्बन्धी आपत्तियों के निस्तारण के बाद हाल ही में धार्मिक तीर्थ स्थलों के दावों का निराकरण किया गया है। इसमें साढ़े सात लग गए।
ये धार्मिक स्थल रहेंगे सीमा में
पाली जिला सीमा में मोहम्मद अलीशाह बाबा की मजार सायरा, झूझारजी का मन्दिर, नागदेवता का मन्दिर देसूरी नाल, तीर्थेश्वर मन्दिर काली घाटी करमाल रोड, सूर्य मन्दिर, परशुराम महादेव आदि को अरण्य तीर्थ में रखा गया है। राणकपुर व मुछाला महावीर तीर्थ के लिएं सुप्रीम कोर्ट से भी पूजा अर्चना व दर्शन को लेकर आदेश पारित करने की प्रति वनविभाग को मुहैया करवाई गई।
राष्ट्रीय उद्यान की सीमा का किया निर्धारण
करमाल चौराहा से कामली घाट चौराहा जाने वाली पक्की सडक़, वनखण्ड भगोड़ा के दक्षिण भाग को शामिल करती हुई इसी वनखण्ड की पूर्वी सीमा पाली एवं राजसमंद जिले के हिस्से को शामिल करते हुए ग्राम पंचायत बघाना से मामादेव तक रहेगी। दक्षिण सीमा वनखण्ड मामादेव से बोर तक तथा पश्चिमी सीमा ग्राम कोरवा के पास वनखण्ड मामादेव की बुझ वनखण्ड मजावाड़ा तक और लाटाड़ा आरक्षित वन की दक्षिणी एवं पश्चिमी सीमा सहित कोट से होकर गुड़ा गाग तक उद्यान की सीमा रहेगी।
परशुराम तीर्थ: जहां लाखों लोग आते हैं दर्शन करने
अरावली की वादियों में पाली व राजसमंद जिलों की संयुक्त सीमा में 3955 फीट की ऊंचाई पर परशुराम महादेव का तीर्थ स्थित है, जहां श्रावण व भाद्रपद माह में प्रतिवर्ष 12 से 15 लाख लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां राज्य स्तरीय मेला व भजन संध्या भी होती है। अब इस तीर्थ को इस राष्ट्रीय उद्यान में ले लिया गया है।
ये चिंतन का विषय
श्रद्धालुओं की सर्वाधिक आवाजाही पाली जिला सीमा से होती हैं, जिनकी सुरक्षा व सुविधार्थ परशुराम कुण्डधाम को उद्यान सीमा से बाहर रखने के लिए तय समय सीमा में आपत्ति दर्ज करवाई थी। लेकिन, ये आपत्ति कहां खो गई, ये चिंतन का विषय है। जबकि, कलक्ट्रेट में आपत्ति लगाई थी।-मदन लुहार देवदत्त बोहरा, ट्रस्टी, परशुराम कुण्डधाम सादड़ी
आस्था से छलावा
परशुराम तीर्थ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं। इसे उद्यान सीमा में रखकर विकास को बाधित करने के साथ ही श्रद्धालुओं की आस्था से छलावा किया जा रहा है। -सुरेशपुरी गोस्वामी, सादड़ी
अब जारी होगी अन्तिम अधिसूचना
सभी दावों का निस्तारण हो चुका है। पाली जिला की सीमा में राणकपुर जैन तीर्थ एवं मुछाला महावीर मन्दिर को उद्यान सीमा से बाहर रखा हैं। शेष सभी धार्मिकस्थलों को उद्यान सीमा के अन्दर रखा गया हैं। हालांकि, सीमा के अंदर धार्मिक स्थलों पर पूजा की मनाही नहीं होगी। लेकिन, वन अधिनियम की पालना करनी होगी। शीघ्र ही अंतिम अधिसूचना जारी होगी। -फतेहसिंह राठौड़, उपवन संरक्षक, राजसमंद





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