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चाय वाला जिसे सामाजिक कार्य के लिए मिला पद्मश्री, फानी साइक्लोन के बाद कर रहा संघर्ष



चाय की दुकान से होने वाली कमाई से स्लम के बच्चों के लिए एक स्कूल भी खोला है जहां फ्री पढ़ाई के साथ-साथ खाना भी फ्री में मिलता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस चाय वाले को 2019 में राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार भी मिल चुका है.

नई दिल्‍ली: पिछले पांच साल में राजनीति में चाय की और चाय बेचने वाले की चर्चा ख़ूब रही. चाय की दुकान पर चुनाव की चर्चाएं भी होती रहती हैं लेकिन एक ऐसा चाय वाला भी है जो पिछले 54 सालों से कटक के बक्सी बाजार में चाय बेच रहा है. सिर्फ चाय नहीं, यह चाय वाला कई सामाजिक कार्य भी कर रहा है. चाय की दुकान से होने वाली कमाई से स्लम के बच्चों के लिए एक स्कूल भी खोला है जहां फ्री पढ़ाई के साथ-साथ खाना भी फ्री में मिलता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस चाय वाले को 2019 में राष्ट्रपति से पद्मश्री पुरस्कार भी मिल चुका है. जिस चाय वाले की बात हो रही है उनका नाम है पद्मश्री डी प्रकाश राव. प्रकाश राव जब छह साल के थे तब से चाय बेच रहे हैं.
प्रकाश राव का जन्म ओडिशा के कटक में हुआ. प्रकाश राव एक अच्छे छात्र भी थे लेकिन राव के पिताजी ने उन्हें चाय के काम में लगा दिया. पांच रुपये में राव के पिताजी चाय की दुकान खोलकर राव को बैठा दिए तब से राव चाय बेच रहे हैं. राव डॉक्टर बनना चाहते थे, फुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे लेकिन न बन पाए. डॉक्टर और फुटबॉलर की जगह चाय वाला बन गए. राव ने बताया कि चायवाला के रूप में जितना नाम कमाया है शायद ही किसी दूसरे काम से कमा सकते थे. चाय की दुकान से राव जितना भी कमाते हैं उसमें से कुछ हिस्सा गरीब बच्चों के लिए खर्च करते हैं. यह स्लम में रहने वाले वो बच्चे हैं जिनके पास पैसा नहीं है, पढ़ाई नहीं करते हैं, भीख मांगते हैं. राव रोज़ चाय की दुकान से एक हज़ार के करीब कमा लेते हैं. उस पैसे में से राव ने बक्सी बाजार के स्लम इलाके में एक स्कूल भी खोला है. इस स्कूल में 100 के करीब गरीब घर के बच्चे पढ़ते हैं. राव खुद टीचर के रूप में इस स्कूल में पढ़ाते हैं. सुबह दस बजे तक राव चाय बेचते हैं और दस बजे के बाद बच्चों को स्कूल में पढ़ाते हैं. शुरुआत में राव अकेले पढ़ाते थे लेकिन आजकल इनके स्कूल में सात टीचर हैं जो फ्री में बच्चों को पढ़ाते हैं.
बच्चों की स्कूल के प्रति रुचि बढ़ाने के राव ने एक अनोखा आईडिया अपनाया है. जो भी बच्चे राव के स्कूल में पढ़ते हैं राव उन्हें फ्री में खाना खिलाते हैं. फ्री में मिल रहे खाने को देखते हुए बच्चे स्कूल आते हैं और पढ़ाई करते हैं. स्कूल के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ती है. सुबह स्कूल शुरू होने से पहले राव सभी बच्चों को अपनी चाय की दुकान में दूध और बिस्कुट खिलाते हैं फिर स्कूल में पढ़ाई खत्म होने के बाद सब को खाना मिलता है. राव के स्कूल में सिर्फ प्री नर्सरी की पढ़ाई होती है. राव ने बताया कि उनके स्कूल को सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है.
सिर्फ गरीब बच्चों की नहीं राव अस्पताल के मरीज़ों की भी मदद करते हैं. अस्पताल में रोज़ के लिए गर्म पानी पहुंचाते हैं, दूध के पॉकेट भी पहुंचाते हैं. यह काम वह पिछले 20 सालों से कर रहे हैं. राव का पीछा करते करते हम उनके स्कूल भी पहुंचे. स्लम इलाके में बने इस स्कूल में सिर्फ एक ही कमरा है और एक छोटा सा ऑफिस. स्लम इलाके के कई लड़कियों ने बताया कि उन लोगों ने राव के स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की थी और आजकल कॉलेज जा रही हैं. स्लम में रहने वाले लोगों ने बताया कि राव के स्कूल में उनके बच्चे फ्री में पढ़ते हैं. राव प्रधानमंत्री मोदी से भी मिल चुके हैं. राव ने बताया कि जब प्रधानमंत्री 2018 में पहली बार कटक गए थे तब वो अपने स्कूल के बच्चों के साथ पीएम मोदी से मिले थे. पीएम मोदी ने राव के काम की काफी तारीफ भी की थी.


राव का घर भी उनके स्कूल के पास ही है. राव की दो बेटियां हैं और दोनों बेटियों को राव ने अच्छी शिक्षा दी है. राव की एक बेटी विदेश में पढ़ती है जबकि दूसरी बेटी कटक के प्रसिद्ध रेवेंशॉव कॉलेज में लेक्चरर है. राव आजकल दूसरे देश भी मोटिवेशनल स्पीच देने जाते हैं. हाल ही में जब ओडिशा में फानी साइक्लोन आया तब राव दुबई में एक कार्यक्रम के लिए गए हुए थे. साइक्लोन ने राव के घर की छत उड़ा दी. राव जब घर पहुंचे तब घर की छत नहीं थी. सामान सब खराब हो गया था. राव ने बताया कि उन्हें अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है. अपना घर ठीक करने के लिए राव ने बैंक से लोन लिया है. राव ने बताया कि साइक्लोन से उनकी चाय की दुकान को भी नुकसान पहुंचा है.