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कांग्रेस को 55 सीटें नहीं मिलीं तो इस बार भी विपक्ष के नेता का पद खतरे में रहेगा


कांग्रेस को 55 सीटें नहीं मिलीं तो इस बार भी विपक्ष के नेता का पद खतरे में रहेगा

  • कांग्रेस को इस बार 52 सीटें मिलती दिख रही हैं; विपक्ष के नेता का पद तभी मिलेगा, जब कांग्रेस को 10% सीटें मिलेंगी
  • कांग्रेस ने पिछली बार 44 सीटें जीती थीं, मल्लिकार्जुन खड़गे लोकसभा में कांग्रेस के नेता बने, लेकिन विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिल पाया

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अभी केरल के वायनाड से आगे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के अमेठी से पीछे चल रहे हैं। वायनाड से जीत पक्की होने के बाद भी लोकसभा में उन्हें विपक्ष के नेता का पद मिलना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस को 52 सीटें मिलती दिख रही हैं। परंपरा के मुताबिक, विपक्ष के नेता का पद सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को तो मिल सकता है, लेकिन उस दल की लोकसभा में 10% सीटें यानी कम से कम 55 सीटें होना जरूरी हैं।

पिछली बार खड़गे लोकसभा में कांग्रेस के नेता ही रहे, विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिला

  1. 16वीं लोकसभा में कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। कांग्रेस सबसे बड़ा विपक्षी दल होने के नाते अपने सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए विपक्ष के नेता का पद मांग रही थी। हालांकि, कांग्रेस की कम सीटें होने के चलते खड़गे को यह पद नहीं मिला। 
  2. खड़गे ने 7 बार लोकपाल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया

    खड़गे को सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता होने के चलते लोकपाल चयन समिति में शामिल किया गया था। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में शामिल होने के लिए खड़गे को सात बार निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन उन्होंने हर बार इससे इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें विपक्ष के नेता की हैसियत से नहीं, बल्कि स्पेशल इनवाइटी के तौर पर बुलाया जा रहा है। इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं होंगे।