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लोकसभा चुनाव नतीजे / 3 राज्यों में विधानसभा हारने के पांच महीने बाद भाजपा की विजय का मंत्र बना राष्ट्रवाद


लोकसभा चुनाव नतीजे / 3 राज्यों में विधानसभा हारने के पांच महीने बाद भाजपा की विजय का मंत्र बना राष्ट्रवाद

  • कांग्रेस की कर्जमाफी की योजना कागज पर पूरी हुई, जमीनी स्तर पर अमल में नहीं लाई जा सकी
  • बालाकोट एयरस्ट्राइक, सवर्णों को 10% आरक्षण इन तीन राज्यों में बड़ा मुद्दा रहे

जयपुर/भोपाल/रायपुर. राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा 2014 जैसा प्रदर्शन दोहराया। मध्यप्रदेश की भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह 3 लाख, गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया करीब 1.25 लाख वोट से पीछे चल रहे हैं। उधर, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव और मानवेंद्र सिंह भी पीछे चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी पार्टी विधानसभा की बड़ी जीत को लोकसभा चुनाव में शिफ्ट नहीं कर पाई। हिंदी पट्टी के इन तीन राज्यों में कांग्रेस 5 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराने में नाकाम रही।

राजस्थान: वसुंधरा तेरी खैर नहीं मोदी तुझसे बैर नहीं 

  1. मध्यप्रदेश की 29 सीटों में भाजपा 28 और कांग्रेस 1 पर आगे चल रही है। वहीं, राजस्थान की सभी 25 सीटों पर भाजपा जीत की तरफ बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ में भाजपा 9 और कांग्रेस 2 पर आगे चल रही है।
  2. राज्य के विधानसभा चुनाव के दौरान एक नारा खूब चला था- 'वसुंधरा तेरी खैर नहीं मोदी तुझसे बैर नहीं'। लोकसभा चुनाव के परिणाम में यह स्पष्ट नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के पीछे मुख्य कारण वसुंधरा सरकार की नीतियां रही।
    • मोदी के राष्ट्रवाद का मुद्दा लोगों के सिर चढ़ कर बोला। खासकर बालाकोट एयरस्ट्राइक के फैसले से मोदी की मजबूत इच्छाशक्ति जाहिर हुई और लोगों ने इसे पसंद किया।
    • मोदी के बड़े कद के सामने जातिवाद पूरी तरह से धरा रह गया। सारे जातीय समीकरण पूरी तरह से गड़बड़ा गए। मसलन लोगों ने जाति के स्थान पर मोदी के हाथ मजबूत करने के लिए उनके प्रत्याशी की जाति पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को मोदी मान वोट दिया। 
    • किसानों का कर्जा माफ करने की योजना का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। कर्जामाफी की घोषणा के बाद दो किसानों की आत्महत्या की खबर ने लोगों की इस सोच को मजबूत किया।
  3. मध्यप्रदेश- चार महीने बाद मोदी फैक्टर से मिली जीत

    मध्यप्रदेश में विधानभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन जरुर था, लेकिन 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद भाजपा का प्रदर्शन बहुत खराब नहीं था।  
    • विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस की जीत की वजह भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी रही। ये कांग्रेस की सही मायने में जीत नहीं थी, कांग्रेस केवल संख्या बल में आगे रही। कांग्रेस को कर्जमाफी के वादे और एससी-एसटी आंदोलन का फायदा मिला। 
    • कर्जमाफी की घोषणा कागज पर पूरी हो गई, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर अमल में नहीं लाया जा सका। 
    • लोगों ने मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट दिया, स्थानीय मुददे इस चुनाव में कहीं पीछे छूट गए। 
    • राज्य में चुनाव राष्ट्रविरोधी और राष्ट्रभक्त की विचारधाराओं में बंट गया, इसी वजह से साध्वी प्रज्ञा आगे चल रही हैं।   
  4. छत्तीसगढ़: कोई दूसरा विकल्प नहीं था

    छत्तीसगढ़ में दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव हुए में 15 सालों से सत्ता पर काबिज भाजपा का सफाया हो गया। लेकिन, लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर से 2014 का प्रदर्शन दोहराने की तरफ बढ़ रही है। रिटायर्ड आईएएस व राजनीतिक विश्लेषक सुशील त्रिवेदी और वरिष्ठ पत्रकार रवि भोई इस जीत के यह प्रमुख कारण मानते हैं।
    • विधानसभा में भाजपा 15 साल से सत्ता में थी। ऐसे में लोग ऊब गए थे। स्थानीय स्तर पर वादे, मुद्दे और एंटी इनकम्बेंसी थी। यही कारण था कि विधानसभा में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया।
    • भाजपा ने सभी 11 लोकसभा सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा। इससे उसे एक बड़ा फायदा होता नजर आया।
    • भाजपा ने राष्ट्रवाद को बड़ा मुद्दा बनाया। जबकि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं था।  
    • चेहरे को लेकर चुनाव लड़ा गया। भाजपा ने शुरू से मोदी को सामने रखा। वो राष्ट्रवाद की राजनीति का चेहरा बन गए। पूरा चुनाव नरेंद्र मोदी V/s राहुल गांधी हो गया। इसका बड़ा फायदा भाजपा मिला।