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भाजपा ने 2014 में जीती 24 सीटें गंवाईं, 56 नई जोड़ीं; कांग्रेस ने अपनी 18 सीटें बचाईं


भाजपा ने 2014 में जीती 24 सीटें गंवाईं, 56 नई जोड़ीं; कांग्रेस ने अपनी 18 सीटें बचाईं

  • कांग्रेस 2014 में जीती 55% सीटों पर हारी, भाजपा ने महज 8% सीटें खोईं
  • भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 13 सीटें गंवाईं, पश्चिम बंगाल में 16 नईं सीटें जोड़ीं
  • पश्चिम बंगाल में तृणमूल और ओडिशा में बीजद ने 2014 की जीती हुईं 40% से ज्यादा सीटें गंवाईं  

नई दिल्ली. इस बार लोकसभा चुनाव में 437 सीटों पर लड़ी भाजपा को 303 सीटें मिलीं। यह अब तक का भाजपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। भाजपा ने पिछली बार 282 सीटें जीतीं थीं। इनमें से 11 सीटें उसने इस बार अपने सहयोगी दलों को दी थी। इस तरह अपनी जीती हुई 271 सीटों पर लड़ते हुए भाजपा ने 247 पर जीत बरकरार रखी और 24 सीटें गंवाईं। कांग्रेस ने 8, सपा-बसपा गठबंधन ने 13 और अन्य दलों ने भाजपा से 3 सीटें छीनीं। हालांकि 56 नई सीटें जोड़कर भाजपा ने न केवल खोई हुई सीटों की भरपाई की, बल्कि जीत का आंकड़ा 303 पर पहुंचा दिया।
 
वहीं, कांग्रेस ने पिछली बार जीती 44 सीटों में से 2 सीटें सहयोगियों को दीं और 42 पर अपने उम्मीदवार उतारे। इनमें से कांग्रेस ने 23 सीटें गंवाईं, 19 पर जीत बरकरार रखी और 33 नई सीटें जोड़ीं। इस तरह कांग्रेस ने कुल 52 सीटें जीतीं। कांग्रेस से सबसे ज्यादा सीटें भाजपा ने छीनीं। कांग्रेस की 2014 में जीती हुई 17 सीटों पर इस बार भाजपा ने उसे हराया। भाजपा के सहयोगी दलों ने भी कांग्रेस से 3 सीटें छीनीं।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और ओडिशा में सबसे ज्यादा नई सीटें जोड़ीं
भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपनी 2 सीटें बरकरार रखीं और 16 नई सीटों पर जीतकर राज्य में अपनी संख्या 18 पर पहुंचा दी। भाजपा ने यहां तृणमूल से 14 सीटें साथ ही माकपा और कांग्रेस से 1-1 सीटें छीनीं। भाजपा का प्रदर्शन कर्नाटक और ओडिशा में भी अच्छा रहा। पार्टी ने कर्नाटक में 8 और ओडिशा में 7 नई सीटें जोड़ीं। ओडिशा में भाजपा ने सभी नई सीटें बीजद को हराकर जोड़ीं।
 
2014 में भाजपा
सहयोगी को दी सीटें
कितनी सीटें गंवाई
2019 में सीटें
उप्र (80)
71
1 सीट अपना दल को
13
62 (57 पुरानी+5 नई)
महाराष्ट्र (48)
23
1 सीट शिवसेना को
1
23 (21 पुरानी+2 नई)
बंगाल (42)
2
 
0
18 (2 पुरानी+16 नई)
बिहार (40)
22
7 सीटें जदयू और लोजपा को
0
17 (15 पुरानी+2 नई)
तमिलनाडु (39)
1
 
1
0
मप्र (29)
27
 
0
28 (27 पुरानी+1 नई)
कर्नाटक (28)
17
 
0
25 (17 पुरानी+8 नई)
गुजरात (26)
26
 
0
26 (26 पुरानी)
आंध्र प्रदेश (25)
2
 
2
0
राजस्थान (25)
25
1 सीट सीट रालोपा को
0
24 (24 पुरानी)
ओडिशा (21)
1
 
0
8 (1 पुरानी+7 नई)
केरल (20)
0
 
0
0
तेलंगाना (17)
1
 
0
4 (1 पुरानी+3 नई)
झारखंड (14)
12
1 सीट आजसू को
1
11 (10 पुरानी+1 नई)
असम (14)
7
 
1
9 (6 पुरानी+3 नई)
पंजाब (13)
2
 
0
2 (2 पुरानी)
छत्तीसगढ़ (11)
10
 
2
9 (8 पुरानी +1 नई)
हरियाणा (10)
7
 
0
10 (7 पुरानी+3 नई)
दिल्ली (7)
7
 
0
7 (7 पुरानी)
कश्मीर (6)
3
 
0
3 (3 पुरानी)
उत्तराखंड (5)
5
 
0
5 ( 5 पुरानी)
हिमाचल (4)
4
 
0
4 ( 4 पुरानी)
मणिपुर (2)
0
 
0
1 (1 नई)
अरुणाचल (2)
1
 
0
2 (1 पुरानी+1 नई)
मेघालय (2)
0
 
0
0
गोवा (2)
2
 
1
1 (1 पुरानी)
त्रिपुरा (2)
0
 
0
2 (2 नई)
अंडमान (1)
1
 
1
0
पुडुचेरी (1)
0
 
0
0
लक्षद्वीप (1)
0
 
0
0
चंडीगढ़ (1)
1
 
0
1 (1 पुरानी)
मिजोरम (1)
0
 
0
0
दादर-नगर हवेली (1)
1
 
1
0
नगालैंड (1)
0
 
0
0
दमन-दीव (1)
1
 
0
1 (1 पुरानी)
सिक्किम (1)
0
 
0
0
कुल (543)
282
11 सीटें सहयोगी दलों को दीं
24
 303 (247 पुरानी जीतीं+56 नई जोड़ीं)
दक्षिण भारत के दो राज्यों ने कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा नई सीटें जोड़ीं 
कांग्रेस ने तमिलनाडु और केरल में 8-8 नई सीटें जोड़ीं। कांग्रेस ने केरल में अकेले 15 सीटें जीतीं, उसके गठबंधन को राज्य की 20 में से 19 सीटों पर जीत मिली। तमिलनाडु में डीएमके के साथ गठबंधन ने कांग्रेस को बड़ा सहारा दिया। पार्टी को पिछली बार तमिलनाडु में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। इस बार तमिल राज्य में कांग्रेस ने 8 सीटें जीतीं। वहीं उसके गठबंधन ने 39 में से 37 सीटें जीतीं। कांग्रेस के लिए तीसरे नंबर पर पंजाब रहा। यहां पार्टी ने 3 पुरानी सीटों पर जीत बरकरार रखते हुए 5 नईं सीटें जोड़ीं।
 
 
2014 में कांग्रेस
सहयोगियों को दी सीटें
कितनी सीटें गंवाई
2019 में सीटें
उत्तर प्रदेश (80)
2
 
1
1 (1 पुरानी)
महाराष्ट्र (48)
2
 
2
1 (1 नई)
पश्चिम बंगाल (42)
4
 
2
2 (2 पुरानी)
बिहार (40)
2
 
1
1 (1 पुरानी)
तमिलनाडु (39)
0
 
0
8 (8 नई)
मध्य प्रदेश (29)
2
 
1
1 (1 पुरानी)
कर्नाटक (28)
9
एक सीट जेडीएस को दी
7
1 (1 पुरानी)
गुजरात (26)
0
 
0
0
आंध्र प्रदेश (25)
0
 
0
0
राजस्थान (25)
0
 
0
0
ओडिशा (21)
0
 
0
1 (1 नई)
केरल (20)
8
 
1
15 (7 पुरानी+8 नई)
तेलंगाना (17)
2
 
1
3 (1 पुरानी+2 नई)
झारखंड (14)
0
 
0
1 (1 नई)
असम (14)
3
 
2
3 (1 पुरानी+2 नई)
पंजाब (13)
3
 
0
8 (3 नई+5 पुरानी)
छत्तीसगढ़ (11)
1
 
1
2 (2 नई)
हरियाणा (10)
1
 
1
0
दिल्ली (7)
0
 
0
0
जम्मू-कश्मीर (6)
0
 
0
0
उत्तराखंड (5)
0
 
0
0
हिमाचल प्रदेश (4)
0
 
0
0
मणिपुर (2)
2
 
2
0
अरुणाचल प्रदेश (2)
1
 
1
0
मेघालय (2)
1
 
0
1 ( 1 पुरानी)
गोवा (2)
0
 
0
1 ( 1 नई)
त्रिपुरा (2)
0
 
0
0
अंडमान निकोबार (1)
0
 
0
0
पुडुचेरी (1)
0
 
0
1 ( 1 नई)
लक्षद्वीप (1)
0
 
0
0
चंडीगढ़ (1)
0
 
0
0
मिजोरम (1)
1
निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया
0
0
दादर एवं नगर हवेली (1)
0
 
0
0
नगालैंड (1)
0
 
0
1 (1 नई)
दमन एवं दीव (1)
0
 
0
0
सिक्किम (1)
0
 
0
0
कुल (543)
44
2 सीटों पर अन्य उम्मीदवारों को समर्थन
23
52 (19 पुरानी जीतीं+ 33 नई जोड़ीं)

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन ने 13 नई सीटें जोड़ीं, सभी पर 2014 में भाजपा जीती थी 
उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और रालोद का गठबंधन, भाजपा को रोक तो नहीं पाया, लेकिन तीनों ने मिलकर भाजपा से 2014 की जीती हुईं 13 सीटें छीन लीं। महागठबंधन को कुल 15 सीटें मिलीं। इनमें सपा ने अपनी पुरानी 5 में से 2 सीटों पर जीत बरकरार रखी और 3 नई सीटें जीतीं। वहीं, पिछली बार एक भी सीट नहीं जीतने वाली बसपा को राज्य में इस बार 10 सीटें मिलीं। रालोद के हाथ इस बार भी खाली ही रहे। राज्य में भाजपा ने 2014 की जीती हुई 71 सीटों में से 57 पर जीत बरकरार रखी और कुल 13 गंवाईं। एक सीट उसने अपने सहयोगी अपना दल को दी थी। भाजपा ने यहां 5 नई सीटें भी जोड़ीं। इनमें 3 सीटें भाजपा ने सपा से और 1 सीट कांग्रेस से छीनीं। वहीं एक सीट उसने अपने सहयोगी अपना दल की सीट से चुनाव लड़कर जीती।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल, ओडिशा में बीजद ने 40% से ज्यादा सीटें गंवाईं
क्षेत्रीय दलों में सबसे ज्यादा नुकसान तृणमूल, बीजद और अन्नाद्रमक को हुआ। तृणमूल ने 2014 में जीतीं 42% सीटें (12) गंवाईं। पार्टी को 2014 में 34 सीटें मिलीं थीं। इस बार उसे 22 पर जीत मिली। पार्टी ने 2 नई सीटें भी जोड़ीं। एक उसने कांग्रेस से और एक माकपा से छीनी। बीजद ने भी 40% सीटें (8) गंवाई। उससे एक सीट कांग्रेस ने और 7 सीटें भाजपा ने छीनीं।